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दक्षिण China सागर में अमेरिका शी जिनपिंग की दीवार तोड़ पाएगा या नहीं?

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China इस साल पहले से ही चर्चा में है, जैसे कि अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध, कोरोनावायरस, लद्दाख में भारत के साथ तनाव का माहौल कौन की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और इसके अलावा कुछ आर्थिक संकट जिसकी मेजबानी खुद चीन में ही की है।
और यह इतना सब होने के बाद अब दक्षिण सागर में भी गंभीर तनाव उत्पन्न कर दिया है
वही माइक पॉम्पियो अमेरिका के विदेश मंत्री ने अब यह साफ तौर पर कहा है कि दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे पूरी तरह से 11 कानूनी है।


मगर अब चीन की क्या योजना है इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए?
आपको बता दें कि वियतनाम और इंडोनेशिया के बीच में पढ़ने वाला यह सागर करीब 35 लाखवर्ग किलोमीटर में फैला हुआ हैऔर इस पर अब वियतनाम कमा फिलिपिंस, मलेशिया, ताइवान, ब्रूनेई और अब चीन भी अपना दावा कर रहे हैं।

वही इस समुद्री इलाके में कुदरती खजाने भरे हुए हैं।
अब चीन में कुछ वर्षों से इस बात पर अधिक जोर देना शुरू कर दिया है कि यह क्षेत्र उसी का है और यह सदियों से उसी का क्षेत्र रहा है। यह भी माना जाता है कि दक्षिण चीन सागर में अपने दावे को मजबूत करने के लिए चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को भी बढ़ावा दे रहा है। वही कुछ दशक पहले इस इलाके में इतनी तनातनी नहीं थी पर चीन ने फिर भी समंदर में खुदाई करने वाले जहाज कामा बहुत बड़ी तादाद में ईट रेत और बजरी से लेकर दक्षिण चीन सागर पहुंचा था। उसने दक्षिण चीन सागर में एक छोटी समुद्र पट्टी के इर्द-गिर्द की मदद से निर्माण का कार्य बहुत बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया

एडमिरल हरि हरि जो कि अमेरिकी पेसिफिक कमांडर के पूर्व कमांडर रह चुके हैं मैं एक बार द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के रूप में इसी चीज गवर्नर करते हुए कहा था कि चीन ने इस समंदर में अपने क्षेत्र के चारों और एक सुरक्षात्मक रिंग भी तैयार कर लिया है और यह रिंग बहुत हद तक जमीन पर बनी दीवार जैसा है।

चीन और अमेरिका जब एक दूसरे के साथ व्यापार तेज कर रहे थे तब भी दक्षिण चीन सागर पर कभी कबार तीखी बयानबाजी होती रही थी पर चीन और अमेरिका ने इस पर खुलकर कभी भी अपने मतभेद जाहिर नहीं किए। चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक संघर्ष के बाद भी अमेरिका ने चीन के क्षेत्रीय विवादों में हमेशा दूसरे देशों के साथ लेने से परहेज किया है अमेरिका की इस क्षेत्र से जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक ना लगे और इन सभी के बाद कोविड-19 जैसी महामारी ने दस्तक दी औरचीन इस महामारी को ठीक से संभालना पाने के कारण अमेरिका ने चीन की आलोचना की और इन्हीं सब से चीन नाराज हो गया।

और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो काकई देशों ने समर्थन किया और अब चीन अपनी दमनकारी रवैया का प्रभाव भी बढ़ाने के लिए करोना महामारी का फायदा उठा रहा है।
इन्हीं सब नतीजों की वजह से दक्षिण चीन सागर में अब तनाव बढ़ रहा है।
सैन्य तनाव चिंताजनक समय में

जब अप्रैल में एक चीनी तटरक्षक उतने पैरासेल दीप समूह के निकट ही मछली पकड़ने वाले एक वियतनामी जहाज को पहले तो टक्कर मारी और फिर डूबा दिया। यह वही क्षेत्र है जिस पर वियतनाम और चीन दोनों ही अपना-अपना दावा करते हैं।

चीनी समुद्री सर्वेक्षण पोतने चीनी नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा समर्थन पाकर बोर्नियो के तट पर एक मलेशियाई तेल खोज परिक्रमा करने वाले काम को भी बाधित किया
इसके नतीजा के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने एक युद्धपोत जो कि ऑस्ट्रेलियाई युद्ध जहाज का समर्थन प्राप्त किया उसे इसी इलाके में भी तैनात करना पड़ गया।

और अब तो अमेरिका ने दो और बड़े युद्धपोत पैरासेल और बैटरी द्वीप के पास भी तैनात कर दिए।
चीन ने हाल ही में पैरासेल दीप समूह के आसपास नौसैनिक अभ्यास करने के लिए बंद कर दिया। इन्हीं सब पर अमेरिका ने गुस्सा आते हुए विवाद ना बढ़े इसके लिए जो चीनी प्रतिबद्धता है चीन के क्षेत्र को बंद करके उल्लंघन भी किया।

क्षेत्र में जॉइंट ऑपरेशन के लिए अमेरिकी नौसेना ने एक नहीं बल्कि दो-दो विमान वाहक युद्धपोत उतार दिए। और फिर अमेरिकी वायुसेना ने स्ट्रैटेजिक बम बम के लिए मशहूर बी- 52 विमान इस क्षेत्र के चक्कर काटने के लिए भेज दिया।

इन सभी के बाद यह उम्मीद थी कि चीन की सरकारी मीडिया इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
वहीं दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना का उतरने का सबसे बड़ा खतरा यही है कि हिंदू प्रतिद्वंदी शक्तियों में शत्रुता और भी बढ़ सकती है और इन सभी के बीच कोई बड़ी घटना होने का खतरा भी है।

देखा जाए तो चीन अपनी मुख्य चिंताओं के प्रति पहले से बहुत ज्यादा मुखड़ा हुआ है और उसका रवैया पहले से ज्यादा रियल है ऐसे में यह स्थिति कुछ खतरनाक हो सकती है।
वहीं भारत के साथ अपनी विवादित सीमा पर चीन ने घातक बल का प्रयोग किया।
हांगकांग में भी उसने बलपूर्वक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया।
ऐसे में दक्षिण चीन सागर के मामले में चीन कितना संयमित हो सकता है?
क्या मकसद है चीन का दक्षिण चीन सागर में?

दक्षिण चीन सागर को चीन अपने समुद्री क्षेत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र मानता है और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यवहारिक रूप है और यह चीन के चीनी बेल्ट एंड रोड परियोजना के सपने का हिस्सा भी माना जाता है।

दक्षिण चीन सागर में चीन ने पहले एक बंदरगाह बनाया था। और फिर हवाई पट्टी हवाई जहाज ओके करने के लिए बनाया। इसे देखते ही चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक सैनिक अड्डा बना लिया और वहां पर आर्टिफिशियल भी बना लिया।
वहीं ग्रेटर बे एरिया इकोनामिक डेवलपमेंट प्लान के लिए दक्षिण चीन सागर चीन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। चीन ने इस प्लान में हांगकांग को भी शामिल किया है।

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चीन ने दक्षिण चीन सागर को आबाद करने के लिए साल 2012 में इस योजना को लांच किया था।
गुरुदेव पर उस समय सांसद सिटी जिससे चीनी प्रशासन संचालन का केंद्र माना जाता है उसे काउंटी से बड़ा दर्जा दिया।

वही मछुआरों के एक समुदाय को यहां चीनी सरकार ने आधुनिक आवासों में बसाया कामा प्राथमिक स्कूल भी खोला गया, उनके लिए एक बैंक और एक अस्पताल भी बनाया। इन सभी के अलावा मोबाइल संचार स्थापित किया और हिंदू ईपेपर तभी से पर्यटन नियमित रूप से घूमने के लिए आते जाते रहे हैं।

दीपक को आबाद करने के लिए दूसरा चरण इस साल अप्रैल में शुरू किया गया जब चीन ने काउंटी स्तर के दो प्रशासनिक जिलों का निर्माण किया। चीन ने जब 6 वर्षों में दक्षिण चीन सागर के दुखों को आबाद करने की शुरुआत की है तभी से उपग्रह और हवाई निगरानी के जरिए यही समझ में आ रहा है कि इस क्षेत्र में चीन ने समुद्री इंजीनियरी और सैन्य निर्माण का दुनिया का बहुत बड़ा कारनामा कर दिखाया है।

सैनी सुविधाओं के अलावा इन द्वीपों पर3 हजार मीटर कारण वे कामा नौसेना के बर्थ’,हैंगर, गोला बारूद के बंकर, मिसाइलों के कोष्ठागार ,व्यवस्थित आवासीय ब्लॉक, रडार साइटें कामा प्रशासनिक भवन यह भवन जो कि सिरेमिक टाइलों से बने हुए हैं, अस्पताल और खेल परिसर भी यहां पर बनाए गए हैं। ऊपर से देखा जाए तो यह द्वीप आप पहले से ज्यादा हरे दिखते हैं।
वहां पर कुछ क्षेत्रों में कोरल रीफ है और अब खेती भी हो रही है। कुछ हिस्सों में चीन से लाए सूअरों के पालन का केंद्र बनाए हुए हैं। और इसी के साथ यहां पर मुर्गी और मच्छी पालन भी किया जा रहा है। चीन एकेडमी ऑफ साइंसेस ने इसी बीच जनवरी 2019 में यहां पर समुद्री विज्ञान अनुसंधान केंद्र की स्थापना की।

5G नेटवर्क की सुविधा भी वहां रह रहे लोगों को दी जा चुकी है। और फल सब्जियां भी उनके लिए जहाजों से भेजे जाते हैं। प्लीज के कुछ इलाकों को मच्छी पालन के लिए भी विकसित किया जा रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि मछली पालने वाले परिवार भी इन द्वीपों पर हमेशा के लिए बस जाएं और चीन की सरकारी अफसरों के बच्चों के साथ उनके बच्चे पार्टी भी स्कूल में पढ़े।

इलाकों को मछली पालने के लिए विकसित हो चुका है चीनी जलमार्ग एक अपरिवर्तनीय?
दक्षिण चीन सागर पर चीन का जोर चीन के लगाए गए प्रतीकात्मक पत्थर से पता चलता है।
प्रचलित दीप समूह के 3 सबसे बड़े रूपों में से 200 से 200 टर्न के विशालकाय स्मारक स्मृति चिन्ह भी अप्रैल 2018 में स्थापित किए गए और फिर उन पर से बड़ी ही गोपनीयता के साथ पर्दा उठा दिया गया। वही ताइवान की सिलाओ से निकाले गए और यह बड़े जहाजों के जरिए पतली द्वीपों पर भेज दिए गए थे यह जो विशालकाय स्मारक स्मृति चिन्ह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सपनों के चीनी कायाकल्प प्रतीक बताए जाते हैं।


चीन के पहाड़ों में से माउंट ताई शाम को सबसे पवित्र बहारों के रूप में देखा जाता है और यह हजारों सालों से अखंड चीनी सभ्यता का भी प्रतीक रहा है। यह सब दिखाता है कि चीन दक्षिण पूर्व एशिया के इस रणनीतिक जलमार्ग को एक अपरिवर्तनीय चीनी स्थल बनाने की योजना कर रहा है अमेरिकी नौसेना के हाली अभियानों का उद्देश्य दक्षिण चीन सागर में समुद्र की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अमेरिकी संकल्प का प्रदर्शन करना था।


वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री ने माइक पॉम्पियो ने यह घोषणा की की चीन के दावे दक्षिण चीन सागर में पूरी तरह से गैरकानूनी है अब यह सवाल उठता है कि अमेरिका आगे क्या करने को तैयार है माइक पॉम्पियो के बयान से यह लगता है कि वह चीन के आत्माओं को प्रदर्शित करने के लिए बड़ी शक्तियों के साथ एक राजनीति गठबंधन का निर्माण करना चाहता है। वहीं चीन के नए ना नशा जिले को अमेरिका बहुत ही कम वक्त में एक कंक्रीट और कोरल के मलबे में बदल सकता है और हकीकत यह है कि युद्ध को झेलने की स्थिति चीन और अमेरिका में भी नहीं है।

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