china and iran president

चीन ईरान के लायन ड्रैगन deal से क्यों नाखुश है ईरान के लोग

ईरान और चीन के बीच मैं एक समझौता हुआ है पर इस समझौते के बारे में अभी तक कोई भी एलान नहीं किया गया है और यह भी बताया जा रहा है की चीन और ईरान के बीच यह समझौता अगले 25 वर्षों तक मान्य होगा
इस सौदे के बारे में आम लोग और विशेषज्ञ तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं और साथ में ही अपनी अपनी राय भी जाहिर कर रहे हैं ईरान की जनता इस समझौते को लेकर निराशावादी नजर आ रही है इस डील को लायन ड्रैगन डील भी इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि ईरान के कट्टरपंथी अखबार जवान ने इस समझौते की खबर को यही शीर्षक लगाया था

आइए जानते हैं इस समझौते के बारे मे

सबसे पहले इस समझौते को 26 जनवरी 2016 में एक साझा बयान के जरिए ऐलान किया गया था उसी वक्त चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ईरान के दौरे पर गए थे
ईरान की तस्लीम समाचार एजेंसी के अनुसार यह डील का अनुच्छेद सिक्स यह कहता है की चीन और ईरान उर्जा ,उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे
इसी समाचार एजेंसी का यह भी कहना है, कि दोनों पक्ष इस दिल में अगले 25 वर्षों के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खमेनेई ने जब चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात के दौरान कुछ देशों की बातचीत की थी इस मुलाकात में खासकर अमेरिका की वर्चस्व आदि नीति की ओर भी इशारा किया गया था उन्होंने यह भी कहा था की ऐसी स्थिति को देखते हुए जो स्वतंत्र देश हैं उन्हें एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा सहयोग करना चाहिए। चीन और ईरान के बीच हुए संपूर्ण हुए रणनीतिक समझौते को दोनों पक्ष अगले 25 वर्षों तक के लिए गंभीरता से पालन करेंगे
खमेनेई के अलावा ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी अनेक मौकों पर अमरीकी पाबंदियों के खिलाफ कई बार चीन के समर्थन और चीन के सहयोगी की भी तारीफ की है
21 जून रूहानी ने एक कैबिनेट बैठक में यह भी कहा था की यह समझौता चीन और ईरान दोनों ही देशों के लिए मूलभूत और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट में भी भागीदारी का मौका है रूहानी ने कहा था कि उन्होंने चीनी पक्ष से बातचीत करने और हुए बातचीत को अंतिम निर्णय देने की सारी जिम्मेदारी विदेश मंत्री जवाद जरीफ को सौंपी है।
आइए जानते हैं ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के बारे में विस्तार से
ईरानी अर्थशास्त्री अली असगर जरगर ने ईरान कीआईएलएनए समाचार एजेंसी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था की।चीन, ईरान और रूस के बीच में तेल से जुड़ा अगर कोई भी समझौता होता है तो वह ऊर्जा ,सुरक्षा और आर्थिक मामलों में भी मददगार साबित होगा।
जरगर ने यह भी कहा कि चीन अपनी नीति के तहत उन्हीं देशों को चुनता है जो किसी अन्य देशों के प्रभाव में ना हो इसीलिए ईरान से चीन को भी स्वतंत्र रूप से मदद मिल सकती है वहीं दूसरी ओर चीन ने ईरान की कुछ परियोजनाओं में भी हिस्सा लिया और इसमें उसका उपनिवेशवादी लालच भी नहीं है इसीलिए इस दिल से चीन और ईरान दोनों देशों को फायदा हो सकता है चीन को ईरान की मौजूदगी से भी इराक में फायदा मिल सकता है जरगर के मुताबिक जहां चीन को ऊर्जा संसाधनों की जरूरत है वही ईरान को भी निवेश और तकनीकी की जरूरत है इसीलिए यह समझौता चीन और ईरान दोनों देशों के हित में होगा।


आइए जानते हैं चीन और ईरान बनाम अमेरिका के बारे में विस्तार से

Donald trump
america president Donald Trump


ईरानी अखबार जवान ने अपनी एक टिप्पणी में यह भी लिखा है कि यह समय ईरान और चीन के बीच डील के लिए सबसे अच्छा समय है क्योंकि मौजूदा वक्त में चीन के सामने अमेरिका भी कमजोर महसूस करता है और चीन भी अमेरिका से असुरक्षित महसूस कर रहा है इसके बाद अखबार यह भी लिखता है कि अमेरिका विरोधी चीन की नीतियां भी इस समझौते के लिए फायदेमंद है अखबार ने ईरानी संसद मजलिस के स्पीकर मोहम्मद कलीबफ के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि हमने देखा है कि ट्रंप प्रशासन कैसे दूसरों देशों की शासन और स्वतंत्रता में भी अपना दखल देता है अमेरिका ने चीन और ईरान के साथ भी ऐसा ही कुछ किया है चीन के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इसी लिए अनिवार्य है क्योंकि हम इसके गवाह रहे हैं और इसे नजरअंदाज भी नहीं कर सकते
ईरानी सरकार के प्रवक्ता अली रविई नहीं समझौते पर कहा था कि इस समझौते के खाके को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
उन्होंने तो यह भी कहा था कि यह समझौता इस बात को साबित करता है की अमेरिका की ईरान को अलग-थलग करने और ईरान से उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों को छिन्न करने की नीति भी अब विफल रही है

क्या इरानी नीति अब बदल रही है

ईरानी वरिष्ठ पत्रकार अहमद जिदाबादी का यह भी मानना है कि ईस्ट पॉलिसी की तरफ नहीं मुड़ रहा बल्कि यह तो अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का भी हिस्सा बन रहा है अहमद लिखते हैं कि दुनिया के साथ दुश्मनी के बजाय चीन स्थिरता पर जोर देता है यह सऊदी अरब इजरायल और ईरान से भी मैत्रीपूर्ण संबंध रखना चाहता है
साथ ही अहमद को यह भी लगता है कि इसी समझौते के वजह से ईरान की अपनी नीतियां तो बदलेंगे ही और वह चीन की नीतियों पर चलने को भी मजबूर हो जाएगा अहमद पूछते हैं कि ईरानी अधिकारियों ने क्या चीन के साथ समझौता अमेरिका और यूरोप को धमकाने के लिए किया है ताकि उस समझौते के बाद उस पर बाद पाबंदी लगा देने वाली अपनी नीतियां में वे नरमी लाएंगे?
साथ में अहमद यह भी अनुमान लगाते हैं कि ईरानी सरकार ने शायद इसीलिए यह समझौता किया होगा क्योंकि उसे अपनी नीतियों में बदलाव करने के अलावा कोई और विकल्प नजर ही नहीं आ रहा होगा |


आखिर क्यों यह डील इतनी गोपनीय है?

china and iran president
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ईरानी सरकार की इस डील के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी ना दिए जाने पर भी आलोचना हो रही है ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने 27 जून को हुए एक रैली में यह कहा था कि जनता की मांगे और इच्छा को जाने बिना किसी भी विदेशी पक्ष के साथ कोई भी समझौता करना देशहित के खिलाफ और अमान्य भी है।
उन्होंने ईरानी सरकार के डील को गोपनी रखे जाने वाले रवैया और अस्पष्टता की भी आलोचना की अहमदीनेजाद ने सरकारी अधिकारियों से यह भी अपील की कि वह इस समझौते के बारे में देश को पूरी जानकारी दें
अहमद नेजाद के लगाए गए आरोपों के जवाब में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मोस्बी ने कहा कि चीन की मंजूरी के बाद मंत्रालय इस समझौते का ब्यौरा प्रकाशित कर सकता है और उन्होंने आरोपों का इनकार करते हुए कहा कि डील कि प्रावधानों में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं है
अर्थशास्त्री मोहसिन शरियातीना ने यह भी कहा कि इस समझौते से यह साबित होता है कि ईरान अब पूरब की तरफ अपनी नरमी वाली रणनीति को भी अपना रहा है उनका यह भी मानना है कि इस डील का रोड मैप रणनीतिक सहयोग है जो कि अलायंस से बिल्कुल अलग है मोहसिन का यह भी मानना है कि ईरान और चीन के विचार, नीतियां और संविधान असल में काफी अलग-अलग है।
जानिए ईरान के लोग क्या कह रहे हैं?
इस बिल की खबरों से ईरान की जनता खुश नहीं नजर आ रही है और सोशल मीडिया पर भी लोग इस समझौते को चीनी उपनिवेशवाद की शुरुआत बता रहे हैं सोशल मीडिया यूजर्स ने 24 घंटों में #iranNot4S ELLnot4RENT के साथ कई बार ट्वीट किया है और यह ट्वीट 17000 से भी ज्यादा है।

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